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चंडीगढ़ से शराब तस्करी का बड़ा खुलासा

Kavita2
8 Sept 2026 5:04 PM IST
चंडीगढ़ से शराब तस्करी का बड़ा खुलासा
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ से दूसरे राज्यों में शराब तस्करी का मामला लगातार सामने आ रहा है। पिछले दो महीनों में ही चंडीगढ़ से तस्करी कर ले जाई जा रही दो करोड़ रुपये से अधिक कीमत की शराब विभिन्न राज्यों में पकड़ी जा चुकी है। इस खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा की पुलिस चंडीगढ़ से जुड़े शराब तस्करी के नेटवर्क की तलाश में जुट गई है।

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि चंडीगढ़ की शराब बिना होलोग्राम और अन्य जरूरी पहचान के दूसरे राज्यों तक कैसे पहुंच रही है। क्योंकि शहर के बॉटलिंग प्लांट और शराब से जुड़े कारोबार एक्साइज विभाग की निगरानी में रहते हैं। ऐसे में विभाग की निगरानी के बावजूद शराब बाहर कैसे निकल रही है, इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

कई राज्यों में पकड़ी गई चंडीगढ़ की शराब

पिछले कुछ समय में अलग-अलग राज्यों की पुलिस ने बड़ी मात्रा में अवैध शराब पकड़ी है। जांच में सामने आया कि बरामद शराब का संबंध चंडीगढ़ से है। इसके बाद दूसरे राज्यों की पुलिस ने चंडीगढ़ में सक्रिय इस नेटवर्क की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में पकड़ी गई शराब के मामलों में तस्करी के तरीकों और सप्लाई चैन की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब किन रास्तों से दूसरे राज्यों तक पहुंचाई जा रही थी और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

बिना होलोग्राम की शराब पहुंचने पर उठे सवाल

शराब की वैध बिक्री और परिवहन के लिए कई नियम निर्धारित हैं। शराब की बोतलों पर पहचान के लिए होलोग्राम और अन्य मार्किंग की व्यवस्था होती है, जिससे उसकी वैधता की पहचान की जा सके।

लेकिन दूसरे राज्यों में पकड़ी गई कुछ शराब की खेपों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बिना होलोग्राम वाली शराब बाजार तक कैसे पहुंच रही है। अगर शराब चंडीगढ़ के लाइसेंस प्राप्त सिस्टम से बाहर जा रही है तो इसमें कहीं न कहीं निगरानी व्यवस्था में कमी की आशंका जताई जा रही है।

बॉटलिंग प्लांट और ठेकेदारों की भूमिका पर नजर

शराब उत्पादन से जुड़े बॉटलिंग प्लांट एक्साइज विभाग की निगरानी में रहते हैं। वहां से निकलने वाली हर खेप का रिकॉर्ड रखा जाता है। इसके बावजूद अगर शराब अवैध रूप से दूसरे राज्यों में पहुंच रही है तो यह जांच का विषय बन गया है।

सूत्रों के अनुसार, शराब तस्करी में कुछ शराब ठेकेदारों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। शहर की कॉलोनियों और गांवों के आसपास स्थित कुछ शराब ठेकों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं लाइसेंसी दुकानों की आड़ में अवैध सप्लाई तो नहीं की जा रही। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि तस्करों को शराब उपलब्ध कराने में किन लोगों की भूमिका हो सकती है।

सस्ती शराब बनी तस्करी का कारण

चंडीगढ़ में शराब की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम हैं। यही वजह है कि यहां से शराब खरीदकर दूसरे राज्यों में महंगे दामों पर बेचने का अवैध कारोबार लंबे समय से चलने की आशंका जताई जाती रही है।

इस साल चंडीगढ़ में शराब के सभी ठेकों की नीलामी पूरी हो चुकी है। एक्साइज विभाग को इससे रिकॉर्ड राजस्व भी प्राप्त हुआ है। हालांकि, शराब कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण ठेकेदारों के सामने मुनाफा बनाए रखना चुनौती बन गया है।

ऐसे में कुछ लोग ज्यादा लाभ कमाने के लिए अवैध रास्तों का सहारा ले सकते हैं। पुलिस और एक्साइज विभाग अब इस पहलू को भी ध्यान में रखते हुए जांच कर रहे हैं।

एक्साइज विभाग की निगरानी पर भी सवाल

शराब कारोबार पूरी तरह से एक्साइज विभाग के नियंत्रण और निगरानी में संचालित होता है। उत्पादन से लेकर बिक्री तक की प्रक्रिया पर विभाग की नजर रहती है।

ऐसे में यदि बड़ी मात्रा में शराब तस्करी के जरिए दूसरे राज्यों में पहुंच रही है तो विभाग की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। अधिकारियों को अब यह पता लगाना होगा कि किस स्तर पर चूक हो रही है।

तस्करी रोकने के लिए बढ़ाई जा सकती है निगरानी

इस पूरे मामले के बाद चंडीगढ़ प्रशासन और एक्साइज विभाग के सामने शराब तस्करी रोकना बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में बॉटलिंग प्लांट, शराब ठेकों और सप्लाई चैन की निगरानी बढ़ाई जा सकती है।

जांच एजेंसियां तस्करी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। यदि जांच में किसी कारोबारी, ठेकेदार या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल चंडीगढ़ से जुड़े शराब तस्करी नेटवर्क की जांच कई राज्यों की पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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